संदेश

2019 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

पढ़ो और आगे बढ़ो

ठहर कर देखना पड़ता है कितनी दूर है मंजिल इस ठहराव को बुजदिल हमारी हार कहते हैं। महरूम-ए-हकीकत हैं साहिल के तमाशाई हम डूब कर समझे हैं दरियाव की गहराई।