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Copy from rajnish mishra face book wall देश के आज़ादी के समय के बाद कोरोना काल एक दूसरा अवसर है जब भारतीय अर्थव्यवस्था को नए सिरे एक अलग दिशा दिया जाए।संवैधानिक व्यवस्था के भाति भारतीय अर्थव्यवस्था भी भारतीय परिवेश से इतर अन्य देशों से भारतीय जन मानस पे थोपा गया।कोरोना ने हमे अवसर दिया है कि हिन्द स्वराज में गांधी द्वारा वर्णित ग्राम आधारित व्यवस्था को स्थापित किया जाय।गांधी ने हिन्द स्वराज में कहा था:-ग्राम्य स्वराज्य से मेरा तात्पर्य एक ऐसे गाँव से है जो पूर्ण गणतंत्र हो और अपनी महत्वपूर्ण आवश्यकताओं के लिए अपने पड़ोसी से स्वतंत्र है। इसलिए सभी गाँवों की पहली चिंता अपने खाने के लिए फ़सलों और कपड़े के लिए कपास का उत्पादन होना चाहिए। पशुओं के लिए चारागाह और वयस्कों और बच्चों के लिए खेल का मैदान छोड़ने के बाद यदि अतिरिक्त ज़मीन बचती है तो गाँजा, तम्बाकू, अफ़ीम को छोड़कर अन्य व्यापारिक फ़सलों के लिए उसका उपयोग किया जा सकता है।” गांधी जी कहा करते थे कि भारत गांवों में बसता है। भारत को जानना है तो गांव को जानना पड़ेगा। स्वतंत्रता के 73 वर्ष बाद भी उनकी यह बात प्रासंगिक है। इसलिए भारत का इलाज करन...

Lockdown ke lekh

नेता सरकार नहीं होता। और नेता अगर भाजपा का हो तब तो बिल्कुल नहीं होता। सरकार होती है ब्यूरोक्रेसी। वह स्थायी सरकार है। ऊपर से नेता बदलते रहते हैं लेकिन अंदरखाने वही ब्यूरोक्रेसी सरकार बनी रहती है। और ब्युरोक्रेट क्या होता है इसे इस बात से समझ जाइये कि उसकी स्थापना ब्रिटिश हूकूमत ने लोगों को लूटने के लिए किया था। ब्रिटिश हुकूमत चली गयी, लेकिन ब्यूरोक्रेसी का मैनुआल आज भी वही है। वह सेवक नहीं, शासक होता है। एक अदने से कानूनगो से लेकर चीफ सेक्रेटरी तक। सब के सब अपने आप को शासक समझते हैं और जनता को अपनी रियासत जिसको मार पीटकर उन्हें ठीक रखना है। इसलिए यह मत देखिए कि ऊपर कौन बैठा है। यह देखिए कि नीचे काम कौन कर रहा है। और जो काम कर रहा है उसके जीवन का एकमात्र सिद्घांत होता है कि काम नहीं करना है। इसलिए सरकारों को गाली देते समय, उसकी आलोचना करते समय जरा भी संकोच मत करिए। क्योंकि आप किसी नेता को नहीं बल्कि उस ब्रिटिश मॉडल वाली नौकरशाही को गाली दे रहे हैं जो जनता का खून चूसने में महारत रखती है। Rajnish mishra

lockdown ke lekh

चिलचिलाती धूप में सड़कों कराह रहे दर्द को देखकर भी मैं उतना दुखी नहीं हूं जितना ये देखकर कि सभी तथाकथित हिन्दूवादियों को इस समय गरीब, मजदूर, कामगारों को छोड़कर बाकी दुनिया के सारे मुद्दे दिख रहे हैं। नहीं। ये लोग अंधे नहीं हैं। सब देख सुन रहे हैं। लेकिन बोलेंगे नहीं। न तो हिन्दूवादी चैनल समाचार दिखायेगा और न सोशल मीडिया के तथाकथित हिन्दूवादी वैरियर इनका मुद्दा उठायेगा। ये वही निष्ठुरता और कायरता है जो किसी साधु की लिंचिंग पर किसी कम्युनिस्ट के मन में जागती है। भारत में प्रचलित दो प्रमुख विचारधाराओं का यह विरोधाभाष है। ये लोग सत्ताधीश देखकर समर्थन या विरोध तय करते हैं। यह घृणित और अमानवीय है। कोई मनुष्य ऐसा कैसे हो सकता है? अरे मनुष्य के नाते न सही हिन्दू होने के नाते ही उनसे सहानुभूति दिखा दो। क्योंकि  शासन की सनक के कारण जो लोग सड़कों पर मारे मारे फिर रहे हैं उसमें 90 प्रतिशत से ज्यादा हिन्दू ही हैं। आम आदमी के दुख दर्द के प्रति राष्ट्रवादियों की गहरी चुप्पी ने मुंझे अंदर तक झकझोड़ कर रख दिया है। मैं उम्मीद कर रहा था कि कुछ लोग तो लिखेंगे। लेकिन मैंने अब तक किसी घोषित राष्ट्...

Lock down joks

[15/05, 13:25]  *आज एक कार पर स्टीकर देखा " *भूतपूर्व करोना मरीज़ "* *जब उसके ड्राइवर से पूछा तो उसने कहा कि इस के कारण ना तो कोई पुलिस वाला कागज चैक करता है और ना ही गाड़ी खड़ी करवाता है ।  😂😂😂😂😂* [15/05, 13:25👶🏻 ब्राह्मणों की कई पीढ़ियों के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि..... पूरे 50 दिन दोनों टाइम का भोजन 🍽️अपने ही घर पर किया है....... 😊* *""कोई न्योता नही....""* कोई जीमण नहीं.... *जीमने की इतिहास में काला अध्याय* इन चीनियों को ब्राह्मणों का भी शाप लगेगा....* 😀😀😀

लौकडाउन के दौरान सोशल मीडिया के जोक्स

[11/0: पंकज उदास की दोनों भविष्यवाणियां सच हुई.... "हुई महंगी बहुत ही शराब के थोड़ी थोड़ी पिया करो" और "निकलो न बेनकाब ज़माना ख़राब है"😍 [13/05, 18:32]: एक सुलगता सवाल???????? जब lockdown शुरू हुआ था तो सरकार ने कहा कि कोई भी जरूरी वस्तुओं के दाम बढ़ायेगा तो कार्रवाई होगी और जेल में डाला जाएगा ।। अब सरकार ने शराब के रेटों में हेवी बढ़ोतरी की है ।। इसे जरूरी सामान में माना जाये या गैर जरूरी ? . . . . . जरूरी है तो बढ़ाया क्यों?? और गैर जरूरी है तो लॉक डाउन में खोलने की आवश्यकता क्या है? बस ऐसे ही पूछ रहा हूं [13/05, 18:32]: वायरस से बचने के लिए भी 'अल्कोहल'..! और इकॉनमी को बचाने के लिए भी 'अल्कोहल'..! ये कैसी विडंबना है प्रभु ! *कही यह अमृत तो नहीं*  😜😝🤣😝😜 [14/05, 10:21] : वायरस से बचने के लिए भी 'अल्कोहल'..! और इकॉनमी को बचाने के लिए भी 'अल्कोहल'..! ये कैसी विडंबना है प्रभु ! कही ... यह अमृत तो नहीं ? 😜😝🤣😝😜 [14/05, 12:41] : लॉकडाउन-4 के बारे में मोदी जी ने *लोकल माल* पर ध्यान देने को बो...

लॉकडाउन में सोशल मीडिया कमेंट

Wife came home with 9 cases of beer, 8 wine bottles, 10 whisky  bottles and *2 Bread 🍞 packets.* Husband : क्या कोई मेहमान आ रहे हैं ? Wife : No Husband : *फिर इतनी Bread लाने की क्या जरूरत थी